धनबाद, अगस्त 4 -- - शिबू सोरेन का नाम सुनते ही शराबियों का नशा हो जाता था गायब धनबाद / प्रमुख संवाददाता बिहार में 2016 में हुई शराबंदी की चर्चा पूरे देश में हुई। झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन ने आज से 50 वर्ष पूर्व शराबबंदी के लिए आंदोलन चलाकर इसे अपने क्षेत्र में लागू कराया। शराब पीते हुए पकड़े जाने पर शिबू सोरेन एक मन (40) लाठी की सजा देते थे। टुंडी और आसपास के इलाके में शिबू सोरेन का ऐसा खौफ था कि शराबी उनका नाम सुनते ही शराब छोड़कर भागने लगते थे। शराबबंदी एवं सूदखोर महाजनों के खिलाफ चलाए गए आंदोलन के कारण ही शिबू सोरेन को आदिवासियों ने दिशोम गुरु की उपाधि दी थी। 1972-73 में शिबू सोरेन ने जिले के टुंडी प्रखंड के सुदूर पलमा और बाद में पोखरिया आश्रम से भूमिगत आंदोलन शुरू किया था। इस दौरान उन्होंने पाया कि आदिवासियों के पिछड़े होने की सबसे ब...
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