रांची, अक्टूबर 6 -- रांची, प्रमुख संवाददाता। शरद पूर्णिमा के अवसर पर सोमवार की रात में यह मान्यता रही कि आसमान से अमृत की बूंदें टपकीं। आसमान में उमड़ते-घुमड़ते बादलों के बीच सनातनी समाज के लोगों ने अमरत्व प्राप्ति के लिए खीर तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की। सूर्यास्त के बाद पूजा-अर्चना कर भक्तों ने गाय के दूध से खीर तैयार की। इसके बाद खीर को साफ बर्तन एवं मिट्टी के पात्र में रखकर सूती कपड़े से बांधा गया। खीर को बाद में छतों एवं खुले परंतु सुरक्षित स्थान पर रखा गया। कई स्थानों पर भक्तों ने देर रात को ही 'अमृत बरसे' खीर का भोग ग्रहण किया। खीर को अमृत समान बनाने की मान्यता मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात में चंद्रमा से विशेष शीतलता के साथ आसमान से अमृत टपकता है। यही अमृत ओस की बूंदों के रूप में धरती पर गिरता है। इन्हीं बूंदों का अंश खुले ...
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