गंगापार, अक्टूबर 5 -- सनातन धर्म में साल की सभी बारह पूर्णिमाओं में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि केवल इसी दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण सोलह कलाओं से युक्त होता है। यह पूर्णिमा वर्षा ऋतु के समापन और शरद ऋतु के आरम्भ का संकेत देती है। इसे रास पूर्णिमा और कोजागरी पूर्णिमा भी कहते हैं। आनंद और ध्रुव योग में आज छह अक्तूबर को शरद पूर्णिमा मनाई जा रही है। शरद पूर्णिमा का धार्मिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा ही वो दिन है, जब चंद्रमा अपनी 16 कलाओं के साथ धरती पर अमृत की वर्षा करता है। पं उमेश शास्त्री दैवज्ञ ने बताया कि शरद पूर्णिमा की चांदनी में अमृत तुल्य औषधीय गुण होता है। अतः शरद पूर्णिमा की रात्रि को चन्द्र देव का पूजन करने के बाद, चावल की खीर को रात भर चांदनी रात में खुले आकाश के नीचे रखा जाता है,...