हमीरपुर, फरवरी 2 -- मौदहा। मंगलवार को होने वाले शब-ए-बारात पर्व को लेकर कब्रिस्तान से लेकर मस्जिदों और मजारों की साफ-सफाई के साथ ही उन्हें चमकाया जा रहा है। सारा दिन कब्रिस्तानों में युवा अपने बुजुर्गों की साफ-सफाई करते रहे। कस्बे के मुस्लिम धर्मगुरू कारी अताउरर्हमान कादरी ने बताया कि रजब और रमजान का दरम्यानी महीना शाबान अल्लाह के रसूल का महीना है और रमजान उम्मत ए मोहम्मदिया का महीना है। अल्लाह के रसूल रजब, शाबान और रमजान में रोजा रखते थे। जिसमें रमजान के रोजा फर्ज हैं। जो शख्स शब ए बारात बाद नमाज़ मगरिब पानी में बेरी का सात पत्ती डालकर इबादत की नियत से गुस्ल करे तो अल्लाह उसके जिस्म की तमाम बीमारियों को दूर करता है और इशा की नमाज़ के बाद अपने पूर्वजों की कब्रों पर जाए, लेकिन अगरबत्ती कब्रों से दूर हटकर लगाएं। कब्र पर आग जलाना सख्त मना है...
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