डॉ. प्रकाशचंद्र गंगराड़े, फरवरी 10 -- तैत्तिरीय संहिता में प्रकृति के सात पावन वृक्षों में पीपल की गणना है। ब्रह्मवैवर्तपुराण में भी पीपल की पवित्रता के संदर्भ में उल्लेख मिलता है। पद्मपुराण के अनुसार पीपल का वृक्ष भगवान विष्णु का रूप है, इसीलिए इसे धार्मिक क्षेत्र में श्रेष्ठ देव वृक्ष की पदवी मिली है। अनेक अवसरों पर पीपल की पूजा का विधान है। सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष में साक्षात भगवान विष्णु एवं लक्ष्मी का वास होता है। पुराणों में पीपल (अश्वत्थ) का बहुत महत्व बताया गया है। स्कंद पुराण के अनुसार, पीपल के पेड़ में त्रिवेद यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है। मान्यता है कि पीपल के मूल (जड़) में भगवान ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु और ऊपरी शाखाओं में भगवान शिव विराजते हैं। इसके अलावा, पीपल में पितरों का वास भी माना जा...