महाराजगंज, जनवरी 26 -- घुघली। घुघली क्षेत्र के ग्राम भुवनी में काली स्थान के प्रांगण में चल रहे शतचंडी महायज्ञ में कथावाचक पंडित सुधीर द्विवेदी ने महर्षि दधीचि की कथा सुनाई। कहा कि जब महर्षि दधीचि के मांसपिंड का दाह संस्कार हो रहा था तो उनकी पत्नी अपने पति का वियोग सहन नहीं कर पायीं। पास में ही स्थित विशाल पीपल वृक्ष के कोटर में 3 वर्ष के बालक को रख स्वयं चिता में बैठकर सती हो गईं। महर्षि दधीचि और उनकी पत्नी का बलिदान हो गया, किन्तु पीपल के कोटर में रखा बालक भूख प्यास से तड़प तड़प कर चिल्लाने लगा। जब कोई वस्तु नहीं मिली तो कोटर में गिरे पीपल के गोदों (फल) को खाकर बड़ा होने लगा। कालान्तर में पीपल के पत्तों और फलों को खाकर बालक का जीवन येन केन प्रकारेण सुरक्षित रहा। कहा कि एक दिन देवर्षि नारद वहां से गुजरे। नारद ने पीपल के कोटर में बालक को ...
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