जामताड़ा, नवम्बर 25 -- करमाटांड़। रोजगार की तलाश में घर छोड़ने वाला करमाटांड़ प्रखंड के सियाटांड़ गांव का 22 वर्षीय पप्पू मंडल अब कभी लौटकर नहीं आएगा। विशाखापट्टनम में अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद इलाज के दौरान उसकी मौत की खबर मिलते ही पूरे गांव पर जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। सोमवार शाम जब एंबुलेंस से उसका शव गांव पहुंचा, तो चीख-पुकार से माहौल गूंज उठा। हर आंख नम थी, हर मन सवालों से भरा क्या यही है मजबूरियों का अंत। मजबूरी में पलायन,प्रवासी मजदूर की मौत: दिव्यांग पिता और बड़े परिवार की जिम्मेदारी उठाते-उठाते पप्पू की उम्र से ज्यादा बोझ उसके कंधों पर था। स्थानीय स्तर पर काम न मिलने और मनरेगा भुगतान महीनों तक अटका रहने से घर चलाना मुश्किल हो गया था। परिवार की मजबूरियों ने उसे 11 अक्टूबर को कमाने के लिए विशाखापट्टनम भेज दिया। परंतु 23 नवंबर क...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.