अररिया, फरवरी 23 -- महीनों पहले से गांवों में लोग गाते थे फाग गीत आधुनिकता की दौर में पुरानी परंपरा तोड़ रही दम रानीगंज, एक संवाददाता एक दशक पहले तक महाशिवरात्रि नजदीक आते ही होली के गीत अवध में होली खेले रघुवीरा, राम के हाथ ढोलक भल सोहे लक्ष्मण हाथे मंजीरा, अवध में होली खेले रघुवीरा, जोगीरा सा रा रा, रा, रा, के स्वर से गांवों की गालियां गुंजायमान हो जाती थी। होली का त्योहार नजदीक आते ही कभी ढोलक की थाप व मंजीरों ( पीतल या कांसे की वाद्ययंत्र) के चारों ओर फाग गीत गुंजायमान होने लगते थे, लेकिन आधुनिकता के दौर में आज के समय में शहरी क्षेत्रों की कौन कहे अब तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी यह परंपरा लुप्त होने लगी है। एक दशक पूर्व तक माघ महीने से ही गांव में फागुनी आहट दिखने लगती थी, लेकिन आज के जमाने में फागुन माह में भी गांव फागुनी महफिलों से अछ...
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