सहरसा, मार्च 20 -- सहरसा, नगर संवाददाता। कभी हमारे घर-आंगन में फुदकने और चहचहाने वाली गौरैया पक्षी आज विलुप्ति के कगार पर पहुंच गई है। दो दशक पूर्व तक आसानी से नजर आने वाली नन्हीं चिड़िया मुश्किल से देखने को मिलती है।हालत यह है कि अब इसे बचाने के लिए गौरैया दिवस मनाना पड़ा रहा है। नन्हीं परिंदे को बचाने के लिए ही प्रत्येक वर्ष 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस के रूप में मनाया जाता है।जिसकी शुरुआत वर्ष 2010 में हुई ताकि लोग इस नन्हीं-सी चिड़िया के संरक्षण के प्रति जागरूक हो सकें।यह दिवस पूरी दुनिया में गौरैया पक्षी के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है।वर्ष 2013 में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गौरैया को राजकीय पक्षी का दर्जा दिया था। घरों को अपनी चीं-चीं से चहकाने वाली गौरैया अब दिखाई नहीं देती।कभी छोटे आकार वाले ...
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