हजारीबाग, मई 8 -- हजारीबाग शिक्षा प्रतिनिधि विभावि के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग में कुलाधिपति व्याख्यानमाला के तहत हमारा समय और कविता की भूमिका विषयक पर बुधवार को संगोष्ठी सह काव्य पाठ का आयोजन किया गया। विषय विशेषज्ञ के रूप में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्राध्यापक श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि कविता आत्मबोध एवं आत्मसंस्कृत से जोड़ती है। साहित्य के अन्य सभी विधाएं कविता के भीतर से अंकुरित होती है। कविता समय के सत्य को उद्घाटित करते हुए मनुष्य के मुक्ति का साधन बनती है। कविता ने हाशिए के समाज की आवाज को न सिर्फ अभिव्यक्ति दी बल्कि उपेक्षित समाज की जागृति में अपने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कविता बुनियादी तौर पर संवादधर्मी विधा रही है। डॉ शुक्ल ने अपनी नवरचित काव्य संग्रह झुकना किसी को रोकना है से कई कविताओं का सुनाया । संगोष्ठी की अध्यक्षता...
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