हमीरपुर, नवम्बर 7 -- भरुआ सुमेरपुर। वर्णिता संस्था के तत्वावधान में क्रांतिकारी विचारों के साक्षी विपिनचंद्र पाल की जयंती मनाई गई। संस्था के अध्यक्ष डॉ.भवानीदीन ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि पाल को क्रांतिकारी विचारों का जनक माना जाता है। इनका जन्म 7 नवंबर 1858 को बंगाल के सिलहट के पोइली में जन्म हुआ था। इनके पिता ताराचंद पाल और मां नारायणी दोनों बहुत विद्वान और संस्कार परायण थे। पाल प्रारंभ से राष्ट्रवादी सोच के व्यक्ति थे। देश के प्रति इनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। देश और विदेश में भारत की आजादी के लिए काम किया है। लाल बाल पाल की तिकड़ी बहुत प्रसिद्ध थी। ये युवा देशभक्तों के प्रेरणा स्त्रोत थे। इन्होंने असहयोग आंदोलन और सविनय अवज्ञा आंदोलन में भी सहयोग प्रदान किया था। कालांतर में इनका 20 मई 1932 को कलकत्ता में निधन हो गय...
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