बदायूं, जनवरी 15 -- सहसवान। अग्रवाल धर्मशाला नयागंज में चल रही श्रीमद भागवत कथा में कथा व्यास हर्षित उपाध्याय ने कृष्ण सुदामा की कथा सुनाते हुए कहा कि भक्ति हमारे आत्मबल को सशक्त करती है। इसलिए भक्तिवान जीवन धैर्यवान जीवन बन जाता है। भक्त इसलिए प्रसन्न नहीं रहते कि उनके जीवन में विषमताएं नहीं रहती हैं अपितु इसलिए प्रसन्न रहते हैं कि उनके जीवन में धैर्य रहता है। जिस जीवन में प्रभु की भक्ति नहीं होगी, निश्चित ही उस जीवन में धैर्य भी नहीं पनप सकता है। भक्त के जीवन में किसी भी प्रकार की विषमताओं से निपटने के लिए अपने इष्ट, अपने आराध्य का नाम अथवा विश्वास का बल होता है। भक्त के जीवन में परिश्रम तो बहुत होता है, लेकिन परिणाम के प्रति कोई आग्रह नहीं होता है। वो इतना अवश्य जानता है कि मेरे हाथ में केवल कर्म है, उसका परिणाम नहीं। विपरीत से विपरीत ...