देवरिया, नवम्बर 9 -- बरहज, हिन्दुस्तान संवाद। क्षेत्र के ग्राम परसिया तिवारी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन पंडित घनश्यामानन्द ओझा ने कहा कि यदि हम अनैतिक विचारों को त्याग कर सकें तो दैवीय विचारधारा खुद ब खुद हममें प्रवाहित होने लगेगी। अपने विचार, शब्द, कर्म, चरित्र और मन पर सदैव नजर रखें। बुद्धि के द्वार बंद मत रखो, अज्ञान का पर्दा हटा दो, दैवीय विचारधारा में स्नान करो, तो स्थाई शाति को उपलब्ध हो जाओगे। उन्होंने कहा कि प्रभु में बिना शर्त विश्वास रखे व बिना अहंकार की सेवा करने से ईश्वर प्रसन्न होता है। पवित्र हृदय ईश्वर का मंदिर होता है, ईश्वर प्रेम है और यहा प्रेम है वहीं पर ईश्वर मौजूद है। अधिक से अधिक प्रेम करो और सब से प्रेम करो। एक बात याद रखो कि अगर प्रेम में आशक्ति हो तो वह प्रेम नहीं रहता, वह मोह हो जाता है। उन्होंने क...