सिमडेगा, नवम्बर 25 -- सिमडेगा, प्रतिनिधि। 26 नवंबर वह दिन है जब भारत ने दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक संविधान अंगीकार किया। यह दिन सिर्फ तिथि नहीं एक सोच, एक विश्वास और एक वादा है। आज संविधान दिवस पर जब हम अधिकारों, कर्तव्यों और लोकतांत्रिक मूल्यों की बात करते हैं तो आदिवासी बहुल सिमडेगा जिला अपने भीतर कई सवाल, चुनौतियां और संभावनाएं समेटे खड़ा दिखता है। सिमडेगा की मिट्टी में परंपराओं की खुशबू है। जंगलों की हरियाली है और जनजातीय अस्मिता की मजबूत जड़ें हैं। लेकिन आज का समय परंपरा का सम्मान करने के साथ साथ आधुनिकता के बीच संतुलन बनाकर ही भविष्य का रास्ता तैयार हो सकता है। संविधान ने हर नागरिक को समान अधिकार, शिक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय का भरोसा दिया। यही भरोसा आज सिमडेगा के विकास का आधार बन सकता है। आज जब हम संविधान ...