वाराणसी, फरवरी 14 -- वाराणसी, कार्यालय संवाददाता। पीलीभीत स्थित राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के शरीर रचना विभाग की डॉ. टीना सिंघल ने कहा कि जब शरीर में वात का प्रकोप, अग्नि की मंदता या धातुओं का पोषण सही ढंग से नहीं होता, तब गर्भधारण में कठिनाई उत्पन्न हो सकती है। आयुर्वेदिक उपचार में शरीर की शुद्धि (पंचकर्म), हार्मोन संतुलन हेतु औषधियां, गर्भाशय को पोषित करने वाली जड़ी-बूटियां जैसे अशोक, लोध्र, शतावरी, और जीवनशैली सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाता है। आईएमएस बीएचयू के आयुर्वेद संकाय के काय चिकित्सा विभाग की ओर से बीएचयू के पं. ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में 'काशी-काय संगमम 2026' के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने चर्चा की। डॉ. टीना ने कहा कि महिला इनफर्टिलिटी आज के समय में एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के अनुसार महिल...
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