देवरिया, जनवरी 12 -- देवरिया, निज संवाददाता। देवरिया शहर के गोरखपुर रोड ओवरब्रिज के नीचे बिना मानचित्र के बना अब्दुल गनी शाह मजार वर्षो से विवादों से घिरा रहा। 90 की दशक में रामनगीना यादव ने मजार का मामला उठाया, बाद में उनकी हत्या हो गई थी। फिर फर्जी इंद्राज के जरिये बंजर भूमि को मजार के नाम से 1992 में कर दिया गया। कई बार मजार को लेकर सवाल भी खड़े किए गए, लेकिन सार्थक पहल व पैरवी न होने के चलते कोई कार्रवाई नहीं हुई। 2025 में सदर विधायक डा.शलभ मणि त्रिपाठी ने न केवल इस मामले को उठाया, बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर पूरी जानकारी दी। जिसके बाद प्रशासन ने तेजी के साथ कार्रवाई शुरू की और फिर अंतत: सरकारी भूमि पर बना मजार रविवार को मलबे की ढेर में समा गया। गोरखपुर रोड स्थित मजार पर पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ती थी। हिन्दूवादी स...