हाथरस, सितम्बर 2 -- सिकंदराराऊ, संवाददाता। बज्मै हाली की महाना नशिस्त अंसारी स्कूल में हुई। जिसकी सदारत जमीरउद्दीन जमीन ने की। शमा रोशन हैदर अली ने व निजामत काशिफ जमाल ने की। नाते पाक मोहम्मद साबिर अली साबिर ने पढ़ी। शायर फैसल कुरैशी ने पढ़ा-रूह में शामिल है फकत नस-नस में नहीं, वह एक सक्श जो मेरी दस तरस में नहीं। अरबाज सिद्दीकी ने कहा- वह कभी अपने किरदार से हार नहीं सकती, जो मां कर रही है कबर में आराम। हम्ज़ा अली ने कहा- हमारी एक यही आदत बुरी नहीं जाती, कि मुफलिसी में भी दरियादिली नहीं जाती। साबिर अली साबिर ने सुनाया- हर इम्तिहा में पास हुआ है हयात के कैसी, सिफत है मां की दुआओं में देखिये। काशिफ जमाल ने पढ़ा- वक्त आया तो एक दिन यह गिर जाएगी, जैसे मिट्टी की दीवार है जिंदगी। शमशुल अहद ने सुनाया-इस दौरे खुद गरज़ में किसे आजमाओगे, जब अपने खून...
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