सहारनपुर, दिसम्बर 4 -- कथावाचक आचार्य सुधीर शर्मा ने कहा कि लोभी कपटी व्यक्ति कभी भी भगवान को नहीं पा सकता और श्रीमद् भागवत मनोरंजन नहीं बल्कि आत्मरंजन का ग्रंथ है। होली चौंक पर आयोजित कथा में श्रीमद्भागवत पर व्याख्यान देते हुए उन्होने कहा कि भागवत श्रवण से पितरों का तर्पण और कई पीढियों का कल्याण और कथा श्रवण से भक्ति, ज्ञान व वैराग्य प्राप्त होता है। भजन व भक्ति ही मानव जीवन का आधार है। प्रभु के सिमरन के लिए ही हमें मानव जीवन मिला हैए लेकिन लोभ और मोह के वशीभूत होकर इसे भूलने से हम बार-बार जीवन-मरण के चक्र में फंस कर दुखों को प्राप्त करते है। भगवान की भक्ति में लीन होकर ही मनुष्य जन्म मरण के झंझट से मुक्त हो सकता है। उन्होने अभिमन्यु पुत्र परिक्षित की कथा का वर्णन किया।

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