नई दिल्ली, दिसम्बर 27 -- हम में से ज्यादातर लोग जिंदगी का बड़ा हिस्सा इस डर में जीते हैं कि लोग हमारे बारे में क्या सोचेंगे। उनकी तारीफ हमें ऊपर उठा देती है और उनकी आलोचना भीतर तक तोड़ देती है। लेकिन आध्यात्मिक गुरु और मोटिवेशनल स्पीकर गौर गोपाल दास समझाते हैं कि लोगों की राय अक्सर हमारी सच्चाई नहीं, बल्कि उनकी सोच, उम्मीदों और अनुभवों का प्रतिबिंब होती है। इसे समझाने के लिए वे एक बेहद सरल लेकिन गहरी सीख देने वाली कहानी सुनाते हैं- समुद्र की कहानी।एक दिन एक महिला का पति समुद्र में डूब गया। दुख से टूटकर उसने रेत पर लिखा, 'समुद्र एक हत्यारा है।'उसी दिन, एक मछुआरे को अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी मछली मिली। खुशी से उसने लिखा, 'समुद्र मेरा पालनहार है।'कुछ दूरी पर एक बच्चा लहरों में अपने जूते खो बैठा। गुस्से में उसने लिखा, 'समुद्र एक चोर है।'आगे चल...
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