नई दिल्ली, नवम्बर 13 -- -एमएलसी अज्ञात दर्ज होने से मुआवजा मिलने में होगी दिक्कत, अब अस्पताल में भट कर रहे परिजन -शास्त्री पार्क के रहने वाले इस ई-रिक्शा चालक का विस्फोर्ट में बचा था सिर्फ शरीर के बीच का हिस्सा नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता अब इसे मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (एमएएमसी) व लोकनायक अस्पताल के फाॅरेंसिक विभाग के डॉक्टरों की लापरवाही कहें या भूलवश हुई गलती लेकिन लाला किला के पास हुए विस्फोट में जान गंवाने वाले 35 वर्षीय जुम्मन के मामले में यह बात सामने आई है कि उसके शव की पहचान होने पर पोस्टमार्टम कर उसे परिजनों को सौंप दिया गया। परिजनों ने उसे सुपूर्दे खाक (अंतिम संस्कार) भी कर दिया गया लेकिन शव की पहचान होने पर डॉक्टर एमएलसी पर उसका नाम चढ़ाना भूल गए। इस वजह से उसके परिजनों को मुआवजा मिलना मुश्किल हो जाएगा। लिहाजा, परिजन अब एमएलसी...