हाथरस, जनवरी 14 -- हाथरस,कार्यालय संवाददाता। शहर की लेवर कॉलोनी का नाम सुनकर लोगों के जहन में एक सवाल उठता है कि यहां लेवर क्लार्स के लोग रहते है। अगर आप ऐसा सोचते है तो बिल्कुल गलत है। यहां जनप्रतिनिधियों से लेकर नौकरपेशा और व्यापारी वर्ग रहता है। किसी मजदूर के पास कोई मकान नहीं है। जिन मजदूरों के नाम आवंटन हुए थे। वह बेचकर जा चुके है। एक-एक आवास केवल दस रुपये के स्टाम्प पर दस-दस बार बिक चुका है। अभी तक श्रम विभाग ने 38 आवासों का आवंटन निरस्त किया है। हाथरस में बिजली कॉटन मिल प्रमुख उद्योग था। इस कारखाने में काम करने वाले मजदूरों के रहने के लिए अलीगढ़ रोड पर लेवर कॉलोनी के नाम से 216 आवास बनाए। उन मजदूरों को आवास आवंटित कर दिये गये। सभी सरकारी आवासों को श्रम विभाग के हवाले कर दिया गया। श्रम विभाग के जरिए ही मजदूरों को आवास आवंटित किए जात...