लखनऊ, दिसम्बर 14 -- आशियाना स्थित चांसलर क्लब में रविवार शाम डाॅ. अनामिका श्रीवास्तव द्वारा लिखित पुस्तक शब्दनाद का विमोचन किया गया। विमोचन के दौरान डा. अनामिका ने कई कविताएं सुनाईं। डॉ. अनामिका ने कहा, ह्दय में जो प्रवेश कर जाय वो कविता है यही उसकी श्रेष्ठता है। जुप्टिर हाॅल में शब्दनाद यानी शब्दों की गूंज से दर्शकदीर्घा को रोमांचित किया। बेटे अनामय देवा को समर्पित कविता 'अंतहीन रास्तों की तरह तुम्हें मिलता रहूंगा मैं' डाॅ. अनामिका ने पढ़ी। इसके साथ पगडण्डी का सफर एक शुरुआत तन्हा तन्हा पर यह देवदार और चिनार इन्हीं के बीच हमसे छिपता छिपता पर पीछे पीछे चल देता है चांद सुनाकर लोगों के दिल को छू लिया। हर रात न जाने कैसे खुद ब खुद हथेली पर उभर आते हैं जैसी काव्य रचनाएं भी सुनाईं। इसी कविता का अंग्रेजी अनुवाद गौरी ने सुनाया। इस मौके पर मुंबई स...