मुजफ्फरपुर, नवम्बर 13 -- मुजफ्फरपुर, हिन्दुस्तान प्रतनिधि। तापमान गिरते ही लीची के पेड़ों में नया कलश आना बंद हो जाता है और जनवरी में मंजर आना शुरू होने लगता है, लेकिन किसान नवंबर-दिसंबर में भी बागों की सिंचाई, जुताई और पेड़ों के नीचे जमीन में रसायनिक खाद का उपयोग कर देते हैं, जिससे कलश आने की संभावना बढ़ जाती है, जो बेहतर मंजर के लिए नुकसानदेह साबित होता है। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र मुशहरी के वरीय वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि दिसंबर तक किसान लीची के बागों का प्रबंधन करने से परहेज करें। बताया कि लगभग 25% किसानों ने पिछले वर्ष लीची के बागों में शुरुआती जाड़े में सिंचाई और जुताई करने की गलती कर दी थी, जिससे उनके लीची के पेड़ों में कम मंजर आ पाया। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र मुशहरी के वरीय वैज्ञानिक डॉ. विनोद कुमार ने ब...