भागलपुर, फरवरी 4 -- कजरा, एक संवाददाता। सनातन धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व अत्यंत विशेष महत्व रखता है। यह पर्व केवल व्रत या पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक है। आचार्य अशोक पांडेय ने कहा कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन ही देवों के देव महादेव ने माता पार्वती को अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था। इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा। शिव-शक्ति का यह मिलन त्याग, तपस्या, अटूट विश्वास और लंबे इंतजार की अनुपम कथा है। कथा के अनुसार माता सती अपने पिता दक्ष द्वारा भगवान शिव के अपमान को सहन नहीं कर सकीं और यज्ञ कुंड में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए। सती के वियोग से व्यथित होकर भगवान शिव ध्यानस्थ हो गए और हिमालय में समाधि में लीन हो गए। शिव के बिना शक्ति और शक्त...