भागलपुर, नवम्बर 13 -- कजरा, एक संवाददाता। किसान सलाहकार अनिल कुमार सिंह ने बताया कि ढैइचा एक बेहतरीन हरी खाद फसल है, जिसे खेत में जुताई से पहले बोया जाता है। यह मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा को स्वाभाविक रूप से बढ़ाता है, जिससे रासायनिक खादों की जरूरत कम पड़ती है। इससे मिट्टी की जैविक संरचना मजबूत होती है और फसल की उत्पादकता में भी इजाफा होता है। ढैइचा की जड़ें मिट्टी को मजबूती देती हैं और जल धारण क्षमता बढ़ाती हैं। इससे सिंचाई की जरूरत कम होती है और सूखे के समय भी मिट्टी में नमी बनी रहती है। यह जल संरक्षण के लिहाज से बहुत फायदेमंद है, खासकर उन इलाकों में जहां सिंचाई की सुविधा सीमित है। ढैइचा की खेती खेत में उगने वाले अवांछित खरपतवारों को दबा देती है। इसकी पत्तियों और जड़ों से निकलने वाले रसायन कीटों और रोगाणुओं के प्रसार को रोकते हैं। य...
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