वाराणसी, नवम्बर 30 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। काशी के लक्ष्मण शास्त्री अपने समय के प्रतिष्ठित वेदांत विद्वान थे। वे सुबह चार बजे अपने दो सौ छात्रों के साथ गंगा स्नान के लिए जाते और 'श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारे, हे नाथ नारायण वासुदेव' मंत्र का संकीर्तन करते थे। स्नान और विश्वनाथ दर्शन के बाद वे वेदांत और न्याय का स्वाध्याय कराते और भगवत भजन के साथ प्रत्येक एकादशी की तिथि पर अहोरात्रि निर्जल उपवास करते थे। लक्ष्मण शास्त्री का तत्कालीन काशीनरेश प्रभुनारायण सिंह बहादुर के साथ घनिष्ठ संबंध था। उनके मार्गदर्शन में पं. मदनमोहन मालवीय ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय के लिए भूमि प्राप्त की। वे भारतीय संस्कृति, धर्म और वेदों के प्रचारक होने के साथ स्वतंत्रता सेनानी भी थे। कोलकाता के राजकीय संस्कृत कॉलेज में वे वेदांत के प्राध्यापक रहे और अंग्रेजों के...