मुजफ्फरपुर, दिसम्बर 3 -- मुजफ्फरपुर। देश की अर्थव्यवस्था में करों की वसूली जितनी अहम है, उतनी ही अहमियत करदाताओं और आयकर एवं वाणिज्य कर विभाग के बीच करों के आदान-प्रदान को सुगम बनाने वाले कर अधिवक्ताओं की। हालांकि हाल के दिनों में आयकर और वाणिज्य कर के नियमों में केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक ने बड़े पैमाने पर बदलाव किए हैं। जिला टैक्सेशन बार एसोसिएशन से जुड़े अधिवक्ताओं का कहना है कि नियम तो बदल रहे हैं, लेकिन तकनीकी पेच फंसने पर अधिकतर समय कॉल सेंटर कार्यकर्ता से बात नहीं हो पाती है। ऐसे में वांछित सुधार नहीं होने से करदाताओं को अनावश्यक करों का भुगतान करना पड़ता है, जबकि वे हमें समस्याओं के समाधान के लिए ही हायर करते हैं। दूसरी ओर, वाणिज्य कर विभाग टैक्सेशन बार एसोसिएशन के सदस्यों की जगह बाहरी लोगों से काम कराने का दबाव करदाताओं पर डाल...