रिषिकेष, अगस्त 26 -- एम्स ऋषिकेश में मंगलवार को तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें जूनोटिक एवं वायरल रोगों की डायग्नोस्टिक तकनीकों के बारे में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों द्वारा बताया गया कि इन रोगों की पहचान और रोकथाम के लिए उन्नत डायग्नोस्टिक तकनीकों को अपनाया जाना जरूरी है। नेशनल वन हेल्थ प्रोग्राम फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ जूनोटिक डिजीजेस (एनओएचपी-पीसीजेड) और वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी (वीआरडीएल) के संयुक्त तत्वावधान में एम्स ऋषिकेश में आयोजित कार्यशाला में विभिन्न राज्यों से आए एमएससी और पीएचडी छात्रों सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी और रिसर्च स्कालर्स शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को जूनोटिक एवं वायरल रोगों की डायग्नोस्टिक तकनीकों में व्यावहारिक प्रशिक्षण देना था। संस्थान की कार...
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