झांसी, जनवरी 6 -- सर्द हवाएं और कड़ाके की सर्दी में जरूरतमंदों को ही रैन बसेरा न मिल सके तो आखिर फिर व्यवस्थाएं किस काम की, और कहीं कहीं तो व्यवस्थाएं भी धड़ाम दिखती है। हालांकि अफसरों के कानों तक पहुंची बात तो अब स्थितियों को दुरुस्त करने में संबंधित जुट गए। यह बात रैन बसेरों की है। जहां कई लोग रैन बसेरों की देहरी तक नहीं पहुंच सके। बेसहारा लोगों को जहां थोडी सी आड़ मिल जाने पर वहीं रात काटने तैयार है। रैन बसेरे नाम के है। यहां पर सुविधाओं का टोटा है। हाल ये है कि कहीं पलंग है तो बिस्तर नहीं और अगर सब है तो बिजली और पानी जैसी मूल भूत सुविधाएं भी नहीं। मेडिकल के पास बने रैन बसेरा को छोड़ दें तो बाकी रैन बसेरा बदहाली से जूझ रहे हैं। शहर में मौजूद चार रैन बसेरा में से एक में ताला लटका हुआ था जो आज आखिर खुल ही गया। ठीक एक दिन पहले सोमवार को इस म...
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