प्रयागराज, जनवरी 7 -- प्रयागराज, वरिष्ठ संवाददाता। रेल कर्मचारी और उनकी पत्नी के निधन के बाद आश्रित बेटियों को अब इलाज और रेलवे पास के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। रेलवे बोर्ड ने सभी जोन और मंडलों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि ऐसी बेटियां रेलवे परिवार का हिस्सा मानी जाएंगी और उन्हें सभी मूलभूत सुविधाएं अनिवार्य रूप से दी जाएंगी। बोर्ड के अनुसार सेकेंडरी फैमिली पेंशन प्राप्त कर रहीं अविवाहित, विधवा या तलाकशुदा बेटियों का उम्मीद कार्ड प्राथमिकता के आधार पर बनाया जाएगा, जिससे वे बिना रुकावट रेलवे अस्पतालों में इलाज करा सकें। साथ ही विडो पास की सुविधा बंद नहीं होगी, बल्कि परिवार की सबसे बड़ी पात्र बेटी के नाम पर स्थानांतरित की जाएगी, जिसमें अन्य आश्रित भी शामिल रहेंगे। सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने कहा कि एनसीआर में यह व्यवस्था पहले से लागू है और...
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