रुद्रपुर, जुलाई 7 -- रुद्रपुर, संवाददाता। हरेला उत्तराखंड का प्रमुख लोकपर्व है, जो प्रकृति पूजा और हरियाली के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। हरेला का त्योहार कुमाऊं में 16 जुलाई को मनाया जाएगा। सोमवार से हरेला पर्व की शुरुआत हो गयी है। सोमवार को पर्वतीय समाज के लोगों ने मंगल गीतों के साथ विधि-विधान से हरेला बोया। लोगों ने एक टोकरी में मिट्टी डालकर उसमें गेहूं, जौ, धान, गहत, मक्का, सरसों सहित 5 या 7 प्रकार के बीज बोए। लगातार नौ दिनों तक इन बीजों को पानी से सींचा जाएगा। नौ दिनों तक इनकी देखभाल की जाएगी। पूजा-अर्चना करने के बाद दसवें दिन हरेला काटा जाएगा। इसके बाद हरेले को घर के मंदिर, ईष्ट देवता, ग्राम देवता और स्थानीय देवताओं को चढ़ाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि हरेला जितना बड़ा होगा, उतना ही किसानों को अपनी फसल से लाभ होगा।
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