जमशेदपुर, जनवरी 21 -- बिष्टूपुर तुलसी भवन में भागवत कथा के छठे दिन मंगलवार को वृंदावन से पधारे कथावाचक रसिया बाबा ने महारास लीला, मथुरा गमन, कंस वध, उद्धव-गोपी संवाद और रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भागवत कथा के सभी प्रसंग श्रीकृष्ण की लीलाओं के महत्वपूर्ण अंग हैं। महारास आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है, मथुरा गमन कंस के अत्याचार से मुक्ति, कंस वध दुष्टों के अंत, उद्धव-गोपी संवाद ज्ञान और भक्ति के समन्वय, जबकि रुक्मिणी विवाह सत्य संकल्प की पूर्ति का संदेश देता है। कथाव्यास ने रुक्मिणी विवाह प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सभी राजाओं को पराजित कर विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी को द्वारका लाकर विधिपूर्वक पाणिग्रहण किया। यह प्रसंग कन्याओं को अच्छे वर और सुखद दांपत्य जीवन की प्राप्ति की कामना से सुना जा...
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