नई दिल्ली, अक्टूबर 15 -- आज ज्यादातर लोग एक ऐसे दौर में जी रहे हैं जहां वो वर्चुअल दुनिया से नजदीक और वास्तविक दुनिया से दूर होते जा रहे है । सुबह उठते ही मोबाइल उठाना, ईमेल चेक करना, इंस्टाग्राम या टिकटॉक पर स्क्रॉल करना, और दिनभर न्यूज अलर्ट्स से घिरे रहना, सोते समय व्हाट्सएप पर मित्रो के साथ गपशप, यह अब हमारी दिनचर्या बन गयी है। कोविड महामारी के बाद तो यह जुड़ाव निजी जीवन में और भी गहराई तक उतर गया है। अब बच्चो की पढ़ाई, कामकाजी लोगो की मीटिंग्स और सामाजिक मेलजोल भी ऑनलाइन होने लगे हैं। फोर्टिस अस्पताल के डॉ. समीर भार्गव कहते हैं कि हमारी टेक्नोलॉजी और कनेक्टिविटी ने निस्संदेह हमारी कार्यक्षमता, संवाद और सुविधा को बढ़ाया है। लेकिन यही निरंतर जुड़ाव कभी-कभी मानसिक थकान, ध्यान की कमी और रिश्तों में दूरी का कारण भी बन जाता है। जब हम हर सम...
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