नई दिल्ली, दिसम्बर 21 -- राहु-केतु का नाम आते ही आमतौर पर लोगों के मन में डर, आशंका और नकारात्मकता भर जाती है। ज्यादातर लोग मान लेते हैं कि कुंडली में राहु या केतु की मौजूदगी जीवन में अचानक संकट, मानसिक तनाव और अस्थिरता लेकर ही आती है। लेकिन ज्योतिषशास्त्र की गहराई में जाकर देखें, तो यह धारणा अधूरी और कई बार पूरी तरह गलत भी साबित होती है। सच यह है कि राहु-केतु ऐसे ग्रह हैं जो इंसान को गिराते भी हैं और उसी गति से ऊपर उठाने की क्षमता भी रखते हैं।राहु अतृप्त इच्छाओं और महत्वाकांक्षा का ग्रह राहु को छाया ग्रह कहा जाता है, लेकिन इसकी शक्ति किसी भी दृश्य ग्रह से कम नहीं मानी जाती। राहु जिस भी भाव में बैठता है, उस भाव से जुड़े विषयों में इंसान को तीव्र इच्छा, लालसा और असंतोष देता है। व्यक्ति जितना भी हासिल कर ले, मन और ज्यादा पाने को बेचैन रहता ...
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