बस्ती, जनवरी 23 -- मखौड़ाधाम। मंगलेश्वरनाथधाम मंदिर पर चल रहे श्रीरुद्र महायज्ञ के तीसरे दिन कथा व्यास आचार्य ऋषभदेव ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के चरित्र का बखान किया। कथा व्यास ने कहा कि रामचरित मानस सिर्फ एक ग्रंथ या किताब नहीं है। इसमें मनुष्य के आदर्श जीवन जीने की कला का सार है। रामचरित मानस हमारे भीतर कठिन परिस्थितियों में धैर्य, राष्ट्रहित में त्याग और समर्पण का भाव प्रकट करता है। आज समाज में एक तरफ राम की पूजा करते हैं तो दूसरी तरफ भाई की संपत्ति पर नजर रखते हैं। जबकि राम ने पिता के एक वचन पर अपना राज्य और वैभव त्यागकर 14 वर्षों के लिए वनवास को अपनाया। उन्होंने कहा कि रामचरित्र मानस छोटे-बड़े और ऊंच-नीच का भेद मिटाकर सबको साथ लेकर चलना सिखाती हैं, तभी तो प्रभु श्रीराम ने सबरी के झूठे बेर खाए और निषादराज को अपना मित्र बनाया। इस म...