वाराणसी, जनवरी 10 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। स्वामी रामानंद ऐसे महान संत थे जिनकी छाया तले सगुण और निर्गुण दोनों मार्ग के संत-उपासक विश्राम पाते थे। जब समाज में हर ओर आपसी कटुता और वैमनस्य का भाव भरा था, तब स्वामी रामानंदाचार्य ने 'जात-पात पूछे ना कोई-हरि को भजै सो हरि का होई' मंत्र दिया। उन्होंने अपनी विचारधारा के बलपर श्रीराम भक्ति का मार्ग सबके लिए खोल दिया। यह किसी एक व्यक्ति का वक्तव्य नहीं। यह संत वक्ताओं के संबोधन का सारांश है जो उन्होंने शनिवार को रामानंदाचार्य की 726वीं जयंती पर आयोजित विद्वत सम्मेलन में किए। कश्मीरीगंज (खोजवां) स्थित रामजानकी मंदिर में हुए सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि रामानंदाचार्य ने अनंतानंद, भावानंद, पीपाजी, सेन नाई, धन्ना जाट, नरहर्यानंद, सुखानंद, कबीरदास, रैदास, सुरसुरानंद, योगानंद, गालवानंद जैसे बारह लो...