वाराणसी, नवम्बर 8 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। प्रो.रामदरश मिश्र के साहित्य का पुनर्मूल्यांकन अत्यंत आवश्यक है। उनका बहुआयामी व्यक्तित्व एवं सर्जना शक्ति की समग्रता नए दौर के साहित्यकारों को प्रेरित करती रहेगी। ये बातें नगर के साहित्यकारों ने कहीं। इनका जुटान साहित्यिक संघ की ओर से आयोजित स्मरण गोष्ठी में हुआ। संघ के ईश्वरगंगी स्थित कार्यालय में स्मरण गोष्ठी में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जितेंद्रनाथ मिश्र ने कहा कि प्रो.रामदरश मिश्र को काशी से गहरा लगाव था। सोच-विचार पत्रिका के उनपर केंद्रित विशेषांक के विमोचन के दौरान आखिरी बार वह काशी आए थे। डॉ. दयानिधि मिश्र ने कहा कि हिंदी साहित्य ने एक ऐसे बिरले व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसकी पूर्ति संभव नहीं है। प्रो. श्रद्धानंद ने उन्हें जमीन से जुड़ा साहित्यकार बताया। नवगीतकार डॉ. अशोक सिंह, ओम धीरज,...