बदायूं, जनवरी 17 -- बिल्सी, संवाददाता। क्षेत्र के गांव पिंडौल के शिव मंदिर पर चल रही श्रीराम कथा के चौथे दिन कथा व्यास पंडित गौरव देव शर्मा के मुखारविंद से भगवान श्रीराम के जन्म प्रसंग और चारों भाइयों के नामकरण संस्कार की विस्तार से कथा सुनाई गई। कथा सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए। कथावाचक ने बताया कि भगवान श्रीराम के जन्म के उपरांत महर्षि वशिष्ठ द्वारा राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघन विधि-विधान से नामकरण संस्कार किया गया। दशरथ के सबसे बड़े पुत्र का नाम 'रामचंद्र' रखा गया, जिसका अर्थ ब्रह्मांड में व्याप्त प्रकाश तत्व से है। लक्ष्मण को शुभ लक्षणों से युक्त होने और श्रीराम के प्रति अटूट प्रेम के कारण यह नाम मिला। भरत और शत्रुघ्न का नामकरण भी महर्षि वशिष्ठ ने किया। चारों भाइयों के बीच परस्पर प्रेम और सौहार्द को चारों वेदों के समान बताया गया। पंडित...