नई दिल्ली, फरवरी 2 -- आज की जीवनशैली में पलने-बढ़ने वाले बच्चे कई तरह की इमोशनल भावनाओं से गुजरते हैं। कभी खुशी, कभी डर, कभी उलझन। ऐसे में उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत होती है भरोसे, अपनेपन और उम्मीद की। पेरेंटिंग कोच अंबिका अग्रवाल बताती हैं कि अगर बच्चे के दिन की शुरुआत प्यार से हो और रात उम्मीद के साथ खत्म हो, तो उसका मन मजबूत बनता है। एक छोटी-सी रात की प्रार्थना बच्चे को यह सिखा सकती है कि वह अकेला नहीं है, उसकी भावनाएँ सही हैं और गलतियाँ उसे छोटा नहीं बनातीं। उन्होनें एक ऐसी प्रेयर बताई है, जिससे बच्चा भीतर से मजबूत बनेगा और जीवन की राह में दृढ़ता से आगे बढ़ सकेगा।1) "Hold my hand and help me choose courage over fear." "हे भगवान, मेरा हाथ पकड़ो और मुझे डर की जगह हिम्मत चुनना सिखाओ।" इसका अर्थ है कि बच्चा खुद को अकेला न महसूस करे। उसे आपस...
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