नई दिल्ली, जनवरी 26 -- देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की वित्तीय जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं, जिसके चलते वे अपनी फंडिंग के लिए बाजार से लिए जाने वाले कर्ज पर ज्यादा निर्भर होते जा रहे हैं। राज्य सरकारें अब लंबी अवधि के बॉन्ड जारी कर पैसा जुटा रही हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, राज्यों के कुल राजकोषीय घाटे का लगभग 76 प्रतिशत हिस्सा इसी बाजार उधारी से पूरा किया जाएगा।कर्ज-जीडीपी अनुपात में वृद्धि की आशंका रिपोर्ट में कहा गया है कि कई राज्यों का कर्ज स्तर अब भी चिंताजनक बना हुआ है। हालांकि मार्च 2024 में राज्यों का कुल कर्ज घटकर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 28.1 प्रतिशत पर आ गया था, लेकिन अनुमान है कि मार्च 2026 तक यह बढ़कर करीब 29.2 प्रतिशत हो जाएगा। कई राज्यों का कर्ज उनकी अपनी अर्थव्यवस्था के 30 प्रत...