सुल्तानपुर, फरवरी 1 -- सुल्तानपुर। श्रीमद् भागवत पुराण कथा में राजा परीक्षित का प्रसंग अत्यंत प्रेरक, वैराग्यपूर्ण और भक्तिमय माना जाता है। यह प्रसंग जीवन की क्षणभंगुरता, मृत्यु की निश्चितता और ईश्वर-भक्ति की सर्वोच्चता का संदेश देता है। धनपतगंज ब्लाक के सरैया मझौवा गांव में चल रही श्रीमद् भागवत पुराण कथा के तीसरे दिन वृंदावन से पधारे कथा वाचक ऋषिराज पांडे ने राजा परीक्षित के इसी प्रसंग पर विस्तार से कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि राजा परीक्षित धर्मपरायण, न्यायप्रिय और प्रजावत्सल शासक थे। एक बार वन में शिकार के दौरान प्यास लगने पर वे ऋषि शमीक के आश्रम पहुंचे। ऋषि उस समय समाधि में लीन थे। उत्तर न मिलने पर अज्ञानवश राजा ने उनके गले में मृत सर्प डाल दिया। इस घटना से क्रोधित ऋषि के पुत्र श्रृंगी ने राजा परीक्षित को शाप दिया कि सातवें दिन तक्षक ...