गोंडा, फरवरी 7 -- नवाबगंज, संवाददाता। क्षेत्र के सिरसा गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में शुक्रवार के रात व्यासपीठ से भक्ति, वैराग्य और आत्मचिंतन का संदेश दिया गया। कथावाचक आचार्य अवधेन्द्र प्रपन्नाचार्य ने राजा परीक्षित के चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। कहा कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य ईश्वर भक्ति और आत्मकल्याण है। कथावाचक ने कहा कि जब शमीक ऋषि के पुत्र श्रृंगी द्वारा राजा परीक्षित को सात दिनों में मृत्यु का श्राप मिला। उन्होंने भय, क्रोध या निराशा का मार्ग नहीं अपनाया। बल्कि इसे प्रभु की प्रेरणा मानते हुए सांसारिक मोह और राजसी वैभव का त्याग कर आत्मकल्याण का संकल्प लिया। उन्होंने बताया कि राजा परीक्षित गंगा तट पहुंचे और भगवान श्रीहरि के स्मरण में लीन हो गए। आचार्य ने कहा कि गंगा तट पर ही राजा परीक्षित को महर्षि वेदव्यास के पुत्र आ...