जयपुर, अक्टूबर 28 -- कभी राजस्थान प्रदेश भाजपा कार्यालय में हर रोज़ फरियादियों की आवाज़ें गूंजती थीं, मंत्री और विधायक सीधे जनता के बीच बैठते थे, और हर कोई उम्मीद लेकर आता था मेरी भी सुनवाई होगी! वक़्त बदला, सरकार बदली, और वो रौनक जैसे किसी कोने में सिमट गई। अब वही जनसुनवाई मॉडल, जो राजस्थान में वसुंधरा राजे सरकार की पहचान था, आज मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में वो फार्मूला अपनाया जा चुका है और राजस्थान में फिर से उसी परंपरा के पुनर्जीवन की मांग तेज हो गई है। प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर वह सवाल उठ रहा है क्या भाजपा अपने पुराने संवाद मॉडल को दोहराएगी? क्या प्रदेश कार्यालय में फिर से मंत्री, विधायक और पदाधिकारी आम लोगों के बीच बैठेंगे? या फिर यह परंपरा सिर्फ दूसरे राज्यों में ही राजस्थान के प्रयोग की मिसाल बनकर रह जाएगी? जनता इंतज़ार में ह...
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