जयपुर, दिसम्बर 9 -- राजस्थान के जिला अस्पतालों के भीतर इन दिनों एक गहरी खामोशी तैर रही है एक ऐसा सन्नाटा, जो दवा वितरण काउंटर से लेकर इमरजेंसी वार्ड तक महसूस किया जा सकता है। वजह सिर्फ संसाधनों की कमी या बढ़ते मरीजों का दबाव नहीं, बल्कि वह खाली कुर्सी है, जिस पर बैठने वाला अधीक्षक महीनों से तय नहीं हो पा रहा। अस्पतालों में फार्मेसी प्रबंधन की कमान कौन संभालेगा? यह सवाल अब आंदोलन का रूप ले रहा है। फार्मासिस्ट संवर्ग ने अब इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा फार्मासिस्टों का पृथक कैडर तो सृजित कर दिया गया, लेकिन विडंबना यह है कि जिलों और मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध अस्पतालों में फार्मासिस्ट अधीक्षक के पद अधिकांश जगहों पर आज भी खाली हैं। मंजूर पद फार्मासिस्ट, फार्मासिस्ट ग्रेड-1, फार्मासिस्ट अधीक्षक और सहा...