झालावाड़, अक्टूबर 23 -- सन्नाटे में फुसफुसाते हुए एक फोन ने पूरे खेत की मिट्टी हिला दी - 8 अगस्त की रात, कामखेड़ा के उस कच्चे रास्ते पर एक अनाम मुखबिर ने जब झालावाड़ साइबर सेल को सूचना दी तो किसी ने सोचा भी नहीं था कि आगे क्या होगा। शुरुआत सामान्य लगी: एक मोबाइल नंबर, कुछ संदिग्ध बैंक ट्रांजैक्शन और कुछ बेनाम खाते। मगर जैसे-जैसे कांस्टेबल रवि सेन और सुमित कुमार के स्क्रीन पर डेटा के पन्ने खुलते गए, रैकेट की परतें एक-एक कर उतरती चली गईं और हर परत के नीचे एक और दूसरों से जुड़ा जाल नजर आता गया। रामावतार सैनी का नाम उस जाल का धागा बनकर उभरा। दौसा के छोटे से गाँव से निकला यह शख्स केवल एक एजेंट नहीं था वह वह शख्स था जिसने सरकारी पोर्टलों की दरवाज़ों की कुंजी समझ ली थी। DMIS और PM किसान जैसे सिस्टमों की तकनीकी बारीकियों को समझकर उसने नकली पहचान,...
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