वाराणसी, जुलाई 30 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। लमही की वास्तविक किरदार को केंद्र में रखकर मुंशी प्रेमचंद ने 'बूढ़ी काकी कहानी लिखी थी। दशकों पहले लमही में लिखी गई कहानी का मर्म मुंशी प्रेमचंद की 145वीं जयंती की पूर्व संध्या पर बुधवार को जीवंत हुआ। नगर की वरिष्ठ रंगकर्मी राजलक्ष्मी मिश्रा ने बूढ़ी काकी के किरदार को अपने भावपूर्ण अभिनय से न सिर्फ जीवंत किया बल्कि दर्शकों की आंखें भी नम कर दीं। सेतु सांस्कृतिक केंद्र की ओर से इसका मंचन बुधवार को लमही में मुंशी प्रेमचंद स्मारक स्थल पर किया गया। कहानी एक वृद्ध महिला की है जिसे उसके परिवार के सदस्य उपेक्षित करते हैं। यहां तक कि घर में मांगलिक उत्सव पर भी बूढ़ी काकी को व्यंजनों से वंचित रखा जाता है। सामाजिक अन्याय और वृद्धों के प्रति उपेक्षा के भाव को उजागर करती यह कहानी बेशक बहुत पुरानी है लेकि...
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