वाराणसी, अप्रैल 21 -- वाराणसी, अरविन्द मिश्र। राग गाया जाए या बजाया जाए। लोग सुनते ही हैं। संकटमोचन संगीत समारोह की पांचवीं निशा में भी श्रोता राग-रागिनियां सुनने की उम्मीद से ही आए थे लेकिन ख्याल गायिकी के सशक्त युवा हस्ताक्षर अरमान खान ने राग को देखने का अरमान भी पूरा कर दिया। श्रोताओं पर सुरों का सुरूर ऐसा चढ़ा कि बंदिश के बोल भूल कर वे सिर्फ रागदारी के प्रति अरमान की वफादारी का सजदा करते रहे। मियां तानसेन की परंपरा से जुड़े उस्ताद बहादुर हुसैन खान के शिष्य उस्ताद इनायत हुसैन खान द्वारा स्थापित रामपुर सहसवान घराना की गायिकी का जादू हनुमत दरबार में मौजूद श्रोताओं के सिर चढ़ कर बोला। समारोह के सौवें संस्करण में प्रथम स्वतंत्र प्रस्तुति देने वाले अरमान लगातार तीसरे साल प्रस्तुति के दौरान पहले के मुकाबले तीन सौ सोपान ऊपर रहे। इसका प्रमाण र...
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