कन्नौज, जनवरी 13 -- कन्नौज। मकर संक्रांति के आते ही आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से सज जाता है। सुबह की धूप के साथ ही छतों पर बच्चों की किलकारियां, युवाओं का उत्साह और बुजुर्गों की मुस्कान एक साथ दिखाई देती है। यह त्योहार सिर्फ पतंग उड़ाने का नहीं, बल्कि परंपरा, मेल-मिलाप और खुशियों को साझा करने का पर्व है। लेकिन बीते कुछ वर्षों से इस खुशी में एक खतरनाक धागा उलझ गया है-चाइनीज मांझा। नायलॉन और कांच से बना यह मांझा इतना तेज होता है कि वह हवा में उड़ती पतंगों के साथ-साथ इंसानों और पक्षियों की जिंदगी भी काट देता है। हर साल मकर संक्रांति के आसपास अस्पतालों में कटे हाथों, जख्मी गर्दनों और घायल पक्षियों के मामले सामने आते हैं। इसी चिंता को देखते हुए इस बार शहर में यह संदेश जोर पकड़ रहा है कि पतंग उड़ाना हमारी संस्कृति है, लेकिन चाइनीज मांझा अपनाना आत...