एटा, दिसम्बर 1 -- गांव से शहर आए। खूब कमाया, खाया, लेकिन वोट बनवाने की बारी में गांव याद आने लगे। शहरी मतदाताओं में करीब 20 फीसदी ऐसे मतदाता हैं, जो एसआईआर में अपना वोट गांव वाला ही रख रहे हैं। शहरी क्षेत्र के वोट से इनकार कर दिया है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू हुआ तो गांव के बीएलओ ने 20 दिन में ही गांव के वोटरों के प्रपत्र लेकर तैयार कर दिए। गांव में वो वोटर रह गए जो अपना घर बनाकर शहर में रह रहे है। बीएलओ इनसे लगातार संपर्क करने लगे तो उनका रवैया टालमटोल वाला रहा। इससे शहर के वोटरों की फीडिंग एक दम गिर गई। शहर के मतदाताओं द्वारा बीएलओ को प्रपत्र वापस न देने पर जिला प्रशासन ने शहर में विशेष टीम लगाई। इसमें एक राजपत्रित अधिकारी भी साथ में लगाया गया। प्रपत्र न देने वाले मतदाताओं से संपर्क किया तो अधिकांश का जवाब था कि हमारा पुश्तैनी ...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.