मिर्जापुर, फरवरी 20 -- मिर्जापुर। इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना रमजान-उल-मुबारक अपने साथ रहमतों और बरकतों की बारिश लेकर आता है। यह सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह अपनी रूह (आत्मा) को शुद्ध करने, खुदा के करीब जाने और मानवता की सेवा करने का एक सुनहरा अवसर है। मोहम्मद अरशद अली का कहना है कि रमजान की फजीलत, अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसी महीने में अल्लाह ने इंसानियत की हिदायत के लिए पवित्र कुरान नाजिल किया था। गुनाहों से तौबा माना जाता है कि इस महीने में अल्लाह अपने बंदों की दुआएं कुबूल करता है और सच्चे दिल से मांगी गई माफी पर गुनाहों को माफ कर देता है। इस महीने में एक नेकी का सवाब (पुण्य) कई गुना बढ़ा दिया जाता है। रमजान के महीने में जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और जहन्नुम (नरक) के दरवाजे बंद कर दिए ज...